Kashmiri seb notes, amazing summary,10th, rk karnataka hindi

इस पोस्ट के अंतर्गत kashmiri seb पाठ से संबंधित Notes को बहुत विस्तार से लिखा गया है। जैसे- Kashmiri seb एक वाक्य के उत्तर, दो-तीन वाक्य के उत्तर, जोड़कर लिखिए, विलोम शब्द लिखिए, अनुरूपता, अन्य वचन, नए शब्द बनाइए, क्रम से लिखिए, kashmiri seb lesson summary in english, hindi kannada और Videos,

यह Kashmiri seb lesson notes छात्रों के लिए बहुत अधिक महत्वपूर्ण है। परीक्षाओं में अच्छे अंक पाने के लिए अधिक लाभकारी है। साथ ही Kashmiri seb lesson summary in hindi, kashmiri seb lesson summary in english पाठ को समझने में बहुत लाभदायक है।

तो चलिए इस इस kashmiri seb notes पोस्ट को पढ़ना शुरू करते हैं।

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Kashmiri seb notes

I. Kashmiri seb एक वाक्य के उत्तर:

1. लेखक चीज़ें खरीदने कहाँ गये थे ?

उत्तर : लेखक चीज़ें खरीदने बाज़ार गये थे।

2. लेखक को क्या नज़र आया ?

उत्तर : लेखक को एक दूकान पर बहुत अच्छा रंगदार, गुलाबी सेब नज़र आया।

3. लेखक का जी क्यों ललचा उठा ?

उत्तर : रंगदार गुलाबी सेबों को देखकर लेखक का जी ललचा उठा।

4. टोमाटो किसका आवश्यक अंग बन गया है ?

उत्तर :टोमाटो भोजन का आवश्यक अंग बन गया है।

5. स्वाद मे सेब किससे बढ़कर नहीं है ?

उत्तर : स्वाद में सेब आम से बढ़कर नहीं है।

6.रोज़ एक सेब खाने से किनकी ज़रूरत नहीं होगी ?

उत्तर : रोज़ एक सेब खाने से डॉक्टर की ज़रूरत नहीं होगी।

II. Kashmiri seb दो-तीन वाक्य के उत्तर:

1. आजकल शिक्षित समाज में किसके बारे में विचार किया जाता है ?

उत्तर : आजकल शिक्षित समाज में विटामिन और प्रोटीन के शब्दों के बारे में विचार किया जाता है।

2. दूकानदार ने लेखक से क्या कहा ?

उत्तर : दूकानदार ने लेखक से कहा- बाबूजी, बड़े मज़ेदार सेब आये हैं, खास कश्मीर के। आप ले जाएँ, खाकर तबीयत खुश हो जायेगी।

3. दूकानदार ने अपने नौकर से क्या कहा ?

उत्तर : दूकानदार ने अपने नौकर से कहा- सुनो, आधा सेर कश्मीरी सेब निकाल ला। चुनकर लाना।

4. सेब की हालत के बारे में लिखिए।

उत्तर : सेब की हालत निम्न प्रकार है- पहला सेब सड़ा हुआ एवं एक रुपये के आकार का छिलका गला हुआ। दूसरा सेब आधा सड़ा हुआ।

तीसरा सेब एक तरफ़ दबकर बिल्कुल चिपका हुआ। चौथा सेब एक काला सुराख जैसे बेरों में होता है। काटने पर भीतर भी वैसे ही धब्बे, जैसे बेर में होते हैं।

अवश्य पढ़ें : Mathrubhumi poem notes

III. जोड़कर लिखिए:

 अ  ब
 सेब को रुमाल में बाँधकर  मुझे दे दिया।
 फल खाने का समय तो  प्रात:काल है।
 एक सेब भी खाने  लायक नहीं।
 व्यापारियों की साख  बनी हुई थी।

IV. Kashmiri seb के विलोम शब्द:

01. शाम X सुबह

02. खरीदना X बेचना

03. बहुत X कम

04. अच्छा X बुरा

05. शिक्षित X अशिक्षित

06. आवश्यक X अनावश्यक

07. गरीब X अमीर

08. रात X दिन

09. संदेह X निसंदेह

10. साफ X मैला

11. बेईमान X ईमान

12. विश्वास X अविश्वास

13. सहयोग X असहयोग

14. हानि X लाभ

15. पास X दूर

16. ग़म X खुशी

V. Kashmiri seb के अनुरूपता प्रश्न:

1. केला : पीला रंग :: सेब : लाल/गुलाबी रंग

2. सेब : फल :: गाजर : सब्जी

3. नागपुर : संतरा :: कश्मीर : सेब

4. कपड़ा : नापना :: टोमाटो : तोलना

VI. अन्य वचन लिखिए:

01. चीज़ें – चीज़

02. रास्ता – रास्ते

03. फल – फल

04. घर – घर

05. रुपए – रुपया

06. आँखें – आँख

07. कर्मचारी – कर्मचारीगण

08. व्यापारी – व्यापारीगण

09. रेवड़ी – रेवड़ियाँ

10. दूकान – दूकान

VII. अंतिम अक्षर से एक और शब्द बनाइए:

उदा : सेब बंदर रंग गरम

01. दूकान नमक कमल लकड़ी

02. बाज़ार रखना नारियल लड़का

03. रुमाल लहसुन नदी दीमक

04. लेखक कवि विजेता तारा

VIII. निम्नलिखित वाक्यों को सही क्रम में लिखिए:

1. गाजर गरीबों भी पहले के पेट की चीज़ भरने थी।

गाजर भी पहले गरीबों के पेट भरने की चीज़ थी।

2. अब चीज़ नहीं है वह केवल स्वाद की।

अब वह केवल स्वाद की चीज़ नहीं है।

3. नहीं लायक खाने भी सेब एक।

एक भी सेब खाने लायक नहीं।

4. मालूम हुई घर आकर अपनी भूल।

घर आकर अपनी भूल मालूम हूई।

IX. कन्नड अथवा अंग्रेजी में अनुवाद कीजिए:

1. गाजर भी पहले गरीबों के पेट भरने की चीज़ थी।

ಗಜ್ಜರಿ ಕೂಡಾ ಮೊದಲು ಬಡವರ ಹೊಟ್ಟೆ ತುಂಬುವ ವಸ್ತು ಆಗಿತ್ತು.

2. दूकानदार ने कहा- बड़े मज़ेदार सेब आये हैं।

ಬಹಳ ರೂಚಿಕರ ಸೇಬು ಬಂದಿವೆ ಎಂದು ಅಂಗಡಿದವನು ಹೇಳಿದ.

3. एक सेब भी खाने लायक नहीं।

ಒಂದು ಸೇಬು ಕೂಡಾ ತಿನ್ನಲು ಯೋಗ್ಯವಿಲ್ಲ.

4. दूकानदार ने मुझसे क्षमा माँगी।

ಅಂಗಡಿದವನು ನನಗೆ ಕ್ಷಮೆ ಕೇಳಿದ.

Kashmiri seb notes video

X. Kashmiri seb summary in hindi

कल शाम को चौक में दो-चार ज़रूरी चीजें खरीदने गया था। पंजाबी मेवाफरोशों की दूकानें रास्ते ही में पड़ती हैं। एक दूकान पर बहुत अच्छे रंगदार, गुलाबी सेब सजे हुए नज़र आये। जी ललचा उठा।

आजकल शिक्षित समाज में विटामिन और प्रोटीन के शब्दों में विचार करने की प्रवृत्ति हो गई है। टोमाटो को पहले कोई भी न पूछता था। अब टोमाटो भोजन का आवश्यक अंग बन गया है।

गाजर भी पहले गरीबों के पेट भरने की चीज़ थी। अमीर लोग तो उसका हलवा ही खाते थे; मगर अब पता चला है कि गाजर में भी बहुत विटामिन हैं ; इसलिए गाजर को भी मेजों पर स्थान मिलने लगा है।

सेब के विषय में तो यह कहा जाने लगा है कि एक सेब रोज़ खाइए तो आपको डॉक्टरों की ज़रूरत न रहेगी। डॉक्टर से बचने के लिए हम निमकौड़ी तक खाने को तैयार हो सकते हैं। सेब तो रस और स्वाद में अगर आम से बढ़कर नहीं है तो घटकर भी नहीं।

सेब को यह स्थान मिल चुका है। अब वह केवल स्वाद की चीज़ नहीं है, उसमें गुण भी हैं। हमने दूकानदार से मोल-भाव किया और आध सेर सेब माँगे।

दूकानदार ने कहा- बाबूजी, बड़े मज़ेदार सेब आए हैं, खास कश्मीर के। आप ले जाएँ, खाकर तबीयत खुश हो जायेगी।

मैंने रुमाल निकालकर उसे देते हुए कहा चुन-चुनकर रखना।

दूकानदार ने तराजू उठायी और अपने नौकर से बोला- सुनो, आध सेर कश्मीरी सेब निकाल ला। चुनकर लाना।

लौंडा चार सेब लाया। दूकानदार ने तौला, एक लिफाफे में उन्हें रखा और रुमाल में बाँधकर मुझे दे दिया। मैंने चार आने उसके हाथ में रखे।

घर आकर लिफ़ाफ़ा ज्यों का त्यों रख दिया। रात को सेब या कोई दूसरा फल खाने का कायदा नहीं है। फल खाने का समय तो प्रातः काल है।

आज सुबह मुँह-हाथ धोकर जो नाश्ता करने के लिए एक सेब निकाला, तो सड़ा हुआ था। एक रुपए के आकार का छिलका गल गया था। समझा, रात को दूकानदार ने देखा न होगा।

दूसरा निकाला। मगर यह आधा सड़ा हुआ था। अब संदेह हुआ, दूकानदार ने मुझे धोखा तो नहीं दिया है।

तीसरा सेब निकाला। यह सड़ा तो न था; मगर एक तरफ दबकर बिलकुल पिचक गया था।

चौथा देखा। वह यों तो बेदाग था; मगर उसमें एक काला सुराख था जैसा अक्सर बेरों में होता है। काटा तो भीतर वैसे ही धब्बे, जैसे बेर में होते हैं।

एक सेब भी खाने लायक नहीं। चार आने पैसों का इतना गम न हुआ जितना समाज के इस चारित्रिक पतन का । दूकानदार ने जानबूझकर मेरे साथ धोखेबाजी का व्यवहार किया।

एक सेब सड़ा हुआ होता, तो मैं उसको क्षमा के योग्य सुमझता । सोचता, उसकी निगाह न पड़ी होगी। मगर चारों के चारों खराब निकल जाएँ,यह तो साफ धोखा है।

मगर इस धोखे में मेरा भी सहयोग था। मेरा उसके हाथ में रुमाल रख देना मानो उसे धोखा देने की प्रेरणा थी। उसने भाँप लिया कि यह महाशय अपनी आँखों से काम लेनेवाले जीव नहीं हैं और न इतने चौकस हैं कि घर से लौटाने आएँ।

आदमी बेईमानी तभी करता है जब उसे अवसर मिलता है। बेईमानी का अवसर देना, चाहे वह अपने ढीलेपन से हो या सहज विश्वास से, बेईमानी में सहयोग देना है।

पढ़े-लिखे बाबुओं और कर्मचारियों पर तो अब कोई विश्वास नहीं करता। किसी थाने या कचहरी या म्युनिसिपैलिटी में चले जाइए, आपकी ऐसी दुर्गति होगी कि आप बड़ी से बड़ी हानि उठाकर भी उधर न जायेंगे।

पहले ऐसा नहीं था। व्यापारियों की साख बनी हुई थी। यों तौल में चाहे छटाँक-आध छटाँक कस लें; लेकिन आप उन्हें पाँच की जगह भूल से दस के नोट दे आते, तो आपको घबराने की कोई ज़रूरत न थी। आपके रुपए सुरक्षित थे।

मुझे याद है, एक बार मैंने मुहर्रम के मेले में एक दूकानदार से एक पैसे की रेवड़ियाँ ली थीं और पैसे की जगह अठन्नी दे आया था। घर आकर जब अपनी भूल मालूम हुई तो दूकानदार के पास दौड़ा गया।

आशा नहीं थी कि वह अठन्नी लौटायेगा, पर लेकिन उसने प्रसन्नचित्त से अठन्नी लौटा दी और उलटे मुझसे क्षमा माँगी।

यहाँ कश्मीरी सेब के नाम से सड़े हुए सेब बेचे जाते हैं। मुझे आशा है, पाठक बाज़ार में जाकर मेरी तरह आँखें न बंद कर लिया करेंगे। नहीं तो उन्हें भी कश्मीरी सेब ही मिलेंगे।

XI. Kashmiri seb summary in kannada:

ನಿನ್ನೆ ಸಂಜೆ ನಾನು ಕೆಲವು ಮುಖ್ಯ ವಸ್ತುಗಳನ್ನು ಖರೀದಿಸಲು ಚೌಕ್‌ಗೆ ಹೋಗಿದ್ದೆ. ಪಂಜಾಬಿ ಹಣ್ಣು ಮಾರಾಟಗಾರರ ಅಂಗಡಿಗಳು ದಾರಿಯಲ್ಲಿದ್ದವು. ಒಂದು ಅಂಗಡಿಯಲ್ಲಿ ಬಹಳ ಸುಂದರವಾದ, ಗುಲಾಬಿ ಬಣ್ಣದ ಸೇಬುಗಳನ್ನು ಜೋಡಿಸಲಾಗಿತ್ತು. ಅವುಗಳನ್ನು ನೋಡಿ ನನಗೆ ಆಸೆಯಾಯಿತು.

ಇತ್ತೀಚಿನ ದಿನಗಳ ವಿದ್ಯಾವಂತ ಸಮಾಜದಲ್ಲಿ ಜೀವಸತ್ವಗಳು ಮತ್ತು ಪ್ರೋಟೀನ್‌ಗಳ ವಿಷಯದಲ್ಲಿ ಯೋಚಿಸುವ ಹವ್ಯಾಸ ಹುಟ್ಟಿ ಕೊಂಡಿದೆ. ಮೊದಲು ಯಾರೂ ಟೊಮೆಟೊ ಬಗ್ಗೆ ಕೇಳುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ. ಈಗ ಟೊಮೆಟೊ ಆಹಾರದ ಅವಿಭಾಜ್ಯ ಅಂಗವಾಗಿದೆ.

ಗಜ್ಜರಿ ಅನ್ನು ಮೊದಲು ಬಡವರಿಗೆ ಆಹಾರಕ್ಕಾಗಿ ಬಳಸಲಾಗುತ್ತಿತ್ತು. ಶ್ರೀಮಂತ ಜನರು ಅದರ ಹಲ್ವಾ ಮಾಡಿ ಮಾತ್ರ ತಿನ್ನುತ್ತಿದ್ದರು; ಆದರೆ ಈಗ ಕ್ಯಾರೇಟ್ ನಲ್ಲಿ ಹಲವು ವಿಟಮಿನ್ ಗಳಿವೆ ಎಂಬುದು ಬೆಳಕಿಗೆ ಬಂದಿದೆ; ಆದ್ದರಿಂದ, ಕ್ಯಾರೇಟ್ ಗಳಿಗೆ ಸಹ ಮೇಜಿನ ಮೇಲೆ ಸ್ಥಾನ ಪಡೆಯಲು ಪ್ರಾರಂಭಿಸಿವೆ.

ಸೇಬಿನ ಬಗ್ಗೆ ಹೇಳುವುದಾದರೆ, ಪ್ರತಿದಿನ ಸೇಬು ತಿಂದರೆ ವೈದ್ಯರ ಅಗತ್ಯವಿರುವುದಿಲ್ಲ. ವೈದ್ಯರನ್ನು ತಪ್ಪಿಸಲು, ನಾವು ಬೇವಿನ ಹಣ್ಣು ತಿನ್ನಲು ಸಿದ್ಧರಾಗುತ್ತೇವೆ. ಸೇಬು ರಸ ಮತ್ತು ರುಚಿಯಲ್ಲಿ ಮಾವಿನಕಾಯಿಗಿಂತ ಉತ್ತಮವಾಗಿಲ್ಲದಿದ್ದರೆ, ಅದು ಕೀಳಲ್ಲ.

ಸೇಬು ಈ ಸ್ಥಾನವನ್ನು ಪಡೆದುಕೊಂಡಿದೆ. ಈಗ ಅದು ರುಚಿಯ ವಿಷಯವಲ್ಲ, ಅದರಲ್ಲಿ ಗುಣಗಳೂ ಇವೆ. ಅಂಗಡಿಯವನೊಂದಿಗೆ ಚೌಕಾಸಿ ಮಾಡಿ ಅರ್ಧ ಕಿಲೋ ಸೇಬು ಕೇಳಿದೆನು.

ಅಂಗಡಿಯವನು ಹೇಳಿದ – ಬಾಬೂಜಿ, ಬಹಳ ರುಚಿಯಾದ ಸೇಬುಗಳು ಬಂದಿವೆ, ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಕಾಶ್ಮೀರದಿಂದ. ನೀವು ಅದನ್ನು ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳಿ, ಅದನ್ನು ತಿಂದ ನಂತರ ನಿಮಗೆ ಸಂತೋಷವಾಗುತ್ತದೆ.

ನಾನು ಕರವಸ್ತ್ರವನ್ನು ತೆಗೆದು ಅವನಿಗೆ ಕೊಟ್ಟು ಅದನ್ನು ಆಯ್ದುಕೊಳ್ಳಲು ಹೇಳಿದೆ.

ಅಂಗಡಿಯವನು ತಕ್ಕಡಿಯನ್ನು ಎತ್ತಿಕೊಂಡು ತನ್ನ ಸೇವಕನಿಗೆ ಹೇಳಿದನು – ಕೇಳು, ಅರ್ಧ ಕಿಲೋಗ್ರಾಂಗಳಷ್ಟು ಕಾಶ್ಮೀರಿ ಸೇಬುಗಳನ್ನು ಹೊರತೆಗೆಯಿರಿ. ಆಯ್ಕೆ ಮಾಡಿ ತನ್ನಿ.

ಹುಡುಗ ನಾಲ್ಕು ಸೇಬುಗಳನ್ನು ತಂದನು. ಅಂಗಡಿಯವನು ಅಳೆದು ತೂಗಿ ಲಕೋಟೆಯಲ್ಲಿಟ್ಟು ಕರವಸ್ತ್ರದಲ್ಲಿ ಕಟ್ಟಿ ನನಗೆ ಕೊಟ್ಟ. ನಾನು ಅವನ ಕೈಯಲ್ಲಿ ನಾಲ್ಕೂ ಆಣೆ ಇಟ್ಟೆ.

ಮನೆಗೆ ಬಂದ ನಂತರ ಲಕೋಟೆಯನ್ನು ಹಾಗೆಯೇ ಇಟ್ಟಿದ್ದೆ. ರಾತ್ರಿಯಲ್ಲಿ ಸೇಬು ಅಥವಾ ಇನ್ನಾವುದೇ ಹಣ್ಣುಗಳನ್ನು ತಿನ್ನುವ ನಿಯಮವಿಲ್ಲ. ಹಣ್ಣುಗಳನ್ನು ತಿನ್ನುವ ಸಮಯ ಬೆಳಿಗ್ಗೆ.

ಇಂದು ಬೆಳಗ್ಗೆ ಕೈ ಮತ್ತು ಮುಖ ತೊಳೆದ ನಂತರ ತಿಂಡಿ ತಿನ್ನಲು ಮೊದಲ ಸೇಬನ್ನು ತೆಗೆದಿದ್ದೆ ಆದರೆ ಅದು ಕೊಳೆತು ಹೋಗಿತ್ತು. ಒಂದು ರೂಪಾಯಿ ಗಾತ್ರದ ಸಿಪ್ಪೆ ಕರಗಿ ಹೋಗಿತ್ತು. ರಾತ್ರಿ ವೇಳೆ ಅಂಗಡಿಯವನು ನೋಡದೇ ಇರಬಹುದೆಂದುಕೊಂಡೆ.

ಇನ್ನೊಂದನ್ನು ಹೊರತೆಗೆದರು. ಆದರೆ ಅದು ಅರ್ಧ ಕೊಳೆತು ಹೋಗಿತ್ತು. ಈಗ ಅಂಗಡಿಯವನು ನನಗೆ ಮೋಸ ಮಾಡಿರಬಹುದು ಎಂಬ ಅನುಮಾನ ಬಂತು.

ಮೂರನೇ ಸೇಬನ್ನು ಹೊರತೆಗೆದೆ. ಅದು ಕೊಳೆತಿರಲಿಲ್ಲ; ಆದರೆ ಒಂದು ಕಡೆ ಭಾಗ ಸಂಪೂರ್ಣ ಅಂಟಿ ಕೊಂಡಿತ್ತು.

ನಾಲ್ಕನೆಯದನ್ನು ನೋಡಿದೆ. ಅದು ನಿರ್ಮಲವಾಗಿದ್ದರೂ; ಆದರೆ ಬಾರೆ ಹಣ್ಣುಗಳಂತೆಯೇ ಅದರಲ್ಲಿ ಕಪ್ಪು ಕುಳಿ ಇತ್ತು. ಕತ್ತರಿಸಿದಾಗ, ಅದರ ಒಳಗೆ ಸಹ ಕಲೆಗಳಿದ್ದವು.

ಒಂದು ಸೇಬು ಕೂಡ ತಿನ್ನಲು ಯೋಗ್ಯವಾಗಿರಲಿಲ್ಲ. ಸಮಾಜದ ಈ ಅನೈತಿಕತೆಯನ್ನು ಕಂಡು ದುಃಖ ವಾಗುತ್ತಿತ್ತು, ನಾಲ್ಕು ಸೇಬುಗಳು ಸರಿ ಇರಲಿಲ್ಲ. ಅಂಗಡಿಯವನು ಉದ್ದೇಶಪೂರ್ವಕವಾಗಿ ನನಗೆ ಮೋಸ ಮಾಡಿದನು.

ಒಂದು ಸೇಬು ಕೊಳೆತಿದ್ದರೆ, ನಾನು ಅದನ್ನು ಕ್ಷಮೆಗೆ ಅರ್ಹವೆಂದು ಪರಿಗಣಿಸುತ್ತಿದ್ದೆ. ಅವನು ಗಮನಿಸದೇ ಇರಬಹುದು ಎಂದುಕೊಂಡೆ. ಆದರೆ ನಾಲ್ಕೂ ಕೆಟ್ಟ ಸೇಬುಗಳು ನೋಡಿದರೆ, ಇದು ಸ್ಪಷ್ಟವಾದ ವಂಚನೆ ಇದೆ.

ಆದರೆ ಈ ಮೋಸದಲ್ಲಿ ನನ್ನ ಕೈವಾಡವೂ ಇತ್ತು. ನಾನು  ಅವನ ಕೈಯಲ್ಲಿ ಕರವಸ್ತ್ರವನ್ನು ಇಡುವುದು ಅವನನ್ನು ಮೋಸಗೊಳಿಸಲು ಪ್ರೇರೇಪಿಸುವಂತಿದೆ. ಅವನು ನನ್ನನ್ನು  ಈ ವ್ಯಕ್ತಿ ನನ್ನ  ಮನೆಗೆ ಹಿಂದಿರುಗುವಷ್ಟು ಎಚ್ಚರವಾಗಿಲ್ಲ ಎಂದು ಕೊಂಡಿದ್ದ.

ಅವಕಾಶ ಸಿಕ್ಕಾಗ ಮಾತ್ರ ಮನುಷ್ಯ ಅಪ್ರಾಮಾಣಿಕತೆ ಮಾಡುತ್ತಾನೆ. ಅಪ್ರಾಮಾಣಿಕತೆಗೆ ಅವಕಾಶವನ್ನು ಒದಗಿಸುವುದು, ಸಡಿಲತೆ ಅಥವಾ ಸರಳ ನಂಬಿಕೆಯ ಮೂಲಕ, ಅಪ್ರಾಮಾಣಿಕತೆಗೆ ಸಹಾಯ ಮಾಡಿದಂತಾಗುತ್ತದೆ.

ಇಗಿನ ಕಾಲದ ವಿದ್ಯಾವಂತ ಹಾಗೂ ಉದ್ಯೋಗಿಗಳನ್ನು ಯಾರೂ ನಂಬುವುದಿಲ್ಲ. ಯಾವುದೇ ಪೊಲೀಸ್ ಠಾಣೆ ಅಥವಾ ನ್ಯಾಯಾಲಯ ಅಥವಾ ಪುರಸಭೆಗೆ ಹೋಗಿ, ನೀವು ಬಹಳ ಕೆಟ್ಟ ಅನುಭವವನ್ನು ಪಡೆಯುವಿರಿ, ಮುಂದೆ ನೀವು ದೊಡ್ಡ ನಷ್ಟವನ್ನು ತೆಗೆದುಕೊಂಡ ನಂತರವೂ ಅಲ್ಲಿಗೆ ಹೋಗುವುದಿಲ್ಲ.

ಮೊದಲು ಹೀಗಿರಲಿಲ್ಲ. ವ್ಯಾಪಾರಿಗಳು ಸ್ವಾಭಿಮಾನ ಹೊಂದಿರುತ್ತಿದ್ದರು. ತೂಕದಲ್ಲಿ ಸ್ವಲ್ಪ ಏರು-ಪೇರು ಆದರೂ ಸಹ; ಹಣದ ವಿಷಯದಲ್ಲಿ ನೀವು ಅವರಿಗೆ ಐದೂ ರೂಪಾಯಿ ನೋಟು ಬದಲಿಗೆ ತಪ್ಪಾಗಿ ಹತ್ತು ರೂಪಾಯಿ ನೋಟು ನೀಡಿದ್ದರು, ನೀವು ಭಯಪಡುವ ಅಗತ್ಯವಿಲ್ಲ. ನಿಮ್ಮ ಹಣ ಸುರಕ್ಷಿತವಾಗಿರುತ್ತಿತ್ತು.

ನನಗೆ ನೆನಪಿದೆ, ಒಮ್ಮೆ ನಾನು ಮೊಹರಂ ಜಾತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಅಂಗಡಿಯವರಿಂದ ಒಂದು ಪೈಸೆಯ ಸಿಹಿ ತಿನಿಸು ತೆಗೆದುಕೊಂಡಿದ್ದೆ, ಒಂದು ಪೈಸೆಯ ಬದಲು ನಾನು ಐವತ್ತು ಪೈಸೆ ನೀಡಿದ್ದೇ. ಮನೆಗೆ ಬಂದು ತನ್ನ ತಪ್ಪಿನ ಅರಿವಾದಾಗ ಅಂಗಡಿಯವನ ಬಳಿ ಓಡಿ ಹೋದೆ.

ಅಂಗಡಿವನು ಹಿಂದಿರುಗಿಸುತ್ತಾನೆ ಎಂದು ನಿರೀಕ್ಷಿಸಿರಲಿಲ್ಲ, ಆದರೆ ಅವನು ಸಂತೋಷದಿಂದ ನನ್ಮ ಐವತ್ತು ಪೈಸೆ ಮರಳಿ ನೀಡಿದನು. ಅಷ್ಟೇ ಅಲ್ಲ ನನ್ನ ಬಳಿ ಕ್ಷಮೆ ಕೇಳಿದನು.

ಆದರೆ ಇಲ್ಲಿ ಕೊಳೆತ ಸೇಬುಗಳನ್ನು ಕಾಶ್ಮೀರಿ ಸೇಬುಗಳ ಹೆಸರಿನಲ್ಲಿ ಮಾರಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಮಾರುಕಟ್ಟೆಗೆ ಹೋಗುವ ಮೂಲಕ ಓದುಗರು ನನ್ನಂತೆ ಕಣ್ಣು ಮುಚ್ಚುವುದಿಲ್ಲ ಎಂದು ನಾನು ಭಾವಿಸುತ್ತೇನೆ. ಇಲ್ಲದಿದ್ದರೆ ಅವರಿಗೂ ಸಹ ಕಾಶ್ಮೀರಿ ಸೇಬುಗಳೆ ಸಿಗುತ್ತವೆ.

XII. Kashmiri seb summary in english:

Yesterday evening I went to the Chowk to buy a few important things. Shops of Punjabi fruit vendors are situated on the way. Very nicely coloured, pink apples were seen arranged in a shop. I felt tempted.

Nowadays educated society have a tendency to think in terms of vitamins and proteins that went. Earlier no one used to ask about tomatoes. Now tomato has become an essential part of food.

Carrots were also used to feed the poor earlier. Rich people used to eat only his pudding; But now it has come to light that carrots also contain many vitamins; Therefore, carrots have also started getting a place on the tables.

Regarding apples, it is said that if you eat an apple every day, you will not need doctors. To avoid the doctor, we may be ready to eat even Nimkauri. If apple is not superior to mango in juice and taste, then it is not inferior either.

Apple has got this place. Now it is not just a matter of taste, it also has qualities. We bargained with the shopkeeper and asked for half a kilo of apples.

The shopkeeper said – Babuji, very tasty apples have arrived, especially from Kashmir. You take it, you will feel happy after eating it.

I took out the handkerchief and gave it to him and told him to keep it selectively.

The shopkeeper picked up the scales and said to his servant – Listen, bring out half a kilogram of Kashmiri apples. Select and bring.

Boy brought four apples. The shopkeeper weighed them, put them in an envelope, tied them in a handkerchief and gave them to me. I placed four annas in his hand.

After coming home, I kept the envelope as it was. There is no rule of eating apple or any other fruit at night. The time to eat fruits is in the morning.

This morning, after washing my hands and face, I took out an apple to have breakfast, but it was rotten. The peel the size of a rupee had melted. I thought the shopkeeper might not have seen it at night.

Took out another one. But it was half rotten. Now I doubt whether the shopkeeper has cheated me.

Took out the third apple. It was not rotten; But it was completely crushed on one side.

Saw the fourth. He was spotless; But there was a black hole in it, as is often the case with berries. When cut, there are spots inside just like plums.

Not even an apple is worth eating. There was not as much sorrow for the four annas as there was for this moral decline of the society. The shopkeeper deliberately cheated me.

If an apple had been rotten, I would have considered it worthy of forgiveness. I thought he might not have noticed. But if all four turn out to be bad, this is a clear deception.

But I also had a hand in this deception. My placing the handkerchief in his hand seemed as if it was an inspiration to deceive him. He realized that this gentleman was not a person who used his eyes nor was he alert enough to return home.

A man commits dishonesty only when he gets an opportunity. Providing opportunity for dishonesty, whether through laxity or simple trust, is aiding dishonesty.

No one trusts educated fathers and employees anymore. Go to any police station or court or municipality, your plight will be such that you will not go there even after suffering huge loss.

It was not like this earlier. The credibility of the traders was intact. In this way, even if you tighten the weight by half or half; But if you had given them ten rupee notes instead of five rupee notes by mistake, you would have had no need to worry. Your money was safe.

I remember, once in the Muharram fair, I had taken coins worth one paisa each from a shopkeeper and gave him eighty-eighth coins in place of the money. When he came home and realized his mistake, he ran to the shopkeeper.

It was not expected that he would return the eight rupees, but he happily returned the eight rupees and instead apologized to me.

Here rotten apples are sold in the name of Kashmiri apples. I hope the readers will not go to the market with their eyes closed like me. Otherwise they will also get Kashmiri apples only.

Kashmiri seb munshi premchand parichay

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